IIT Patna Recruitment 2026: JRF/SRF Opportunity in Electrical Engineering VLSI & ML Project

यह विज्ञापन जूनियर रिसर्च फेलो (जेआरएफ) नामक पद के लिए है। यह कोई स्थायी सरकारी नौकरी नहीं है, बल्कि एक विशिष्ट शोध परियोजना पर काम करने के लिए एक अस्थायी नियुक्ति है। इस पद पर आप एक शोध छात्र के रूप में कार्य करेंगे। इसे आप रिसर्च फेलोशिप भी कह सकते हैं, जहां आपको वजीफा (फेलोशिप/सैलरी) मिलता है और साथ ही आप एक महत्वपूर्ण तकनीकी विषय पर गहन शोध करते हैं।

कहां काम करना होगा और टीम कौन सी है?

आपका काम स्थल आईआईटी पटना, बिहटा, पटना- ८०११०६ स्थित विद्युत अभियांत्रिकी विभाग (Department of Electrical Engineering) होगा। आप सीधे तौर पर इस परियोजना के मुख्य अन्वेषक (Principal Investigator) डॉ. कैलाश चंद्र रे के निर्देशन में काम करेंगे। टीम में आपके अलावा अन्य शोधार्थी और संभवतः परियोजना से जुड़े स्नातक/परास्नातक छात्र भी होंगे। यह एक छोटी, किंतु अत्यधिक विशिष्ट और केंद्रित शोध टीम होगी।

काम क्या है? (परियोजना की गहन व्याख्या)

आप जिस परियोजना पर काम करेंगे, उसका नाम है: “एमएल एनेबल्ड आरआईएससी-वी बेस्ड आई-लोरा एसओसी फॉर फॉरेस्ट इवेंट मॉनिटरिंग” (ML Enabled RISC-V based i-LoRa SOC for Forest Event Monitoring) । इसे आसान भाषा में समझते हैं:

यह परियोजना जंगलों में होने वाली घटनाओं (जैसे आग लगना, पेड़ कटना, वन्यजीवों की आवाजाही आदि) पर नजर रखने के लिए एक विशेष तरह की चिप (एसओसी – सिस्टम ऑन चिप) विकसित करने के बारे में है।

  • आरआईएससी-वी (RISC-V): यह एक नया और मुफ्त (ओपन-सोर्स) कंप्यूटर आर्किटेक्चर है। इसका मतलब है कि हम इस चिप के प्रोसेसर को अपनी जरूरत के हिसाब से डिजाइन कर सकते हैं, बिना किसी बड़ी कंपनी को लाइसेंस फीस दिए।
  • आई-लोरा (i-LoRa): लोरा (LoRa) एक तकनीक है जो बहुत कम बिजली खर्च करके डेटा को काफी लंबी दूरी तक भेज सकती है। “i” का मतलब शायद इंटेलिजेंट (बुद्धिमान) है। यानी यह चिप जंगल के अंदर से डेटा को दूर तक भेजने में सक्षम होगी।
  • एमएल एनेबल्ड (ML Enabled): एमएल यानी मशीन लर्निंग। इस चिप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के कुछ एल्गोरिदम लगे होंगे। इसका मतलब है कि चिप खुद ही यह समझने की कोशिश करेगी कि सेंसर से मिल रहा डेटा (जैसे तापमान में अचानक वृद्धि) आग लगने का संकेत है या सामान्य दिन की गर्मी है।
  • एसओसी (SOC): सिस्टम ऑन चिप। यानी पूरा सिस्टम (प्रोसेसर, मेमोरी, मशीन लर्निंग वाला हिस्सा, और लोरा ट्रांसमीटर) सब एक ही चिप पर होगा।

सीधे शब्दों में कहें तो: आप एक ऐसी बेहद होशियार और कम बिजली खाने वाली चिप बनाने में मदद करेंगे, जिसे जंगलों में लगे सेंसर में डाला जा सके। यह चिप खुद सोच-समझकर खतरे (जैसे आग) का पता लगाएगी और उसकी सूचना दूर-दराज के केंद्र तक भेज देगी।

कब से कब तक काम है? (अवधि)

इस पद की कुल अवधि परियोजना की अवधि पर निर्भर करती है।

  • जेआरएफ के तौर पर: पहले दो वर्ष
  • वरिष्ठ शोध फेलो (एसआरएफ) के तौर पर: दो साल बाद, प्रदर्शन संतोषजनक रहने पर, आपको एसआरएफ बना दिया जाएगा और आप परियोजना के शेष समय तक (जो कुल तीन वर्ष है, और संभवतः एक और वर्ष बढ़ सकता है) उस पद पर काम करेंगे।

कुल मिलाकर, आप इस परियोजना से कम से कम ३ वर्ष और अधिकतम ४ वर्ष तक जुड़े रह सकते हैं।

वजीफा (सैलरी) कितना है?

यह एक फेलोशिप है, इसलिए इसे वजीफा या स्टाइपेंड कहा जाता है:

  • जेआरएफ (पहले दो साल): रुपये ३७,००० प्रति माह।
  • एसआरएफ (अगले साल): रुपये ४२,००० प्रति माह।

यह राशि कर-मुक्त (टैक्स फ्री) होती है, लेकिन समय-समय पर आयकर नियमों के अनुसार बदलाव हो सकता है।

इस पद के लिए योग्यता क्या है?

यह पद अत्यधिक विशिष्ट है, इसलिए योग्यताएं भी स्पष्ट और कड़ी हैं। मुख्य रूप से तीन प्रकार के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं:

श्रेणीन्यूनतम शैक्षिक योग्यतान्यूनतम अंकआवश्यक परीक्षाअधिकतम आयु सीमा (विज्ञापन तिथि अनुसार)
प्राथमिकता-१एम.टेक. (वीएलएसआई/एम्बेडेड सिस्टम/माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स/इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम/कम्युनिकेशन सिस्टम/इंस्ट्रूमेंटेशन एवं कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग)सीपीआई ६.५ या ६०% अंकयोग्य गेट स्कोर (पिछले ५ वर्षों में)३२ वर्ष
प्राथमिकता-२बी.टेक./बी.ई./एम.एससी. (इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक्स/कम्युनिकेशन/इंस्ट्रूमेंटेशन/कंप्यूटर साइंस)सीपीआई ७.५ या ७०% अंकयोग्य गेट स्कोर (पिछले ५ वर्षों में)२८ वर्ष
छूट (विशेष)आईआईटी से बी.टेक.सीपीआई ७.५ या अधिकगेट से छूट (गेट अनिवार्य नहीं)२८ वर्ष
प्रत्यक्ष एसआरएफ (असाधारण)एम.टेक. डिग्रीन्यूनतम दो वर्ष का प्रासंगिक अनुभव (साक्षात्कार में प्रदर्शन के आधार पर)
बिना गेट (जेआरएफ के लिए)ऊपर बताई गई डिग्रियांगेट स्कोर न होने पर भी, यदि डोमेन में उत्कृष्ट अनुभव/एक्सपोजर हो तो जेआरएफ के लिए विचार किया जा सकता है।संबंधित डिग्री के अनुसार

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • एससी/एसटी/ओबीसी/महिला/दिव्यांग उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
  • वीएलएसआई, एम्बेडेड सिस्टम, कंप्यूटर आर्किटेक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, मशीन लर्निंग के क्षेत्र में कार्य/शोध अनुभव और ईडीए टूल्स (Vivado, Cadence, MATLAB आदि) का ज्ञान होने को प्राथमिकता दी जाएगी।

किन स्वाभाविक कौशलों (Natural Skills) की आवश्यकता होगी?

शैक्षिक योग्यता के अलावा, कुछ स्वाभाविक यूं कहे की जन्मजात या विकसित कौशल आपको इस पद पर सफल बना सकते हैं:

  • गहन जिज्ञासा: यह सबसे जरूरी गुण है। आपको यह जानने की उत्सुकता होनी चाहिए कि चीजें कैसे काम करती हैं, खासकर चिप के अंदर क्या होता है।
  • समस्या-समाधान की क्षमता: शोध में रोड़े आते ही रहते हैं। सर्किट काम नहीं करेगा, सिमुलेशन में गलती होगी। आपको हार न मानकर समस्या की जड़ तक जाने की आदत होनी चाहिए।
  • धैर्य और दृढ़ता: चिप डिजाइन एक लंबी प्रक्रिया है। एक छोटे से बदलाव के लिए घंटों इंतजार करना पड़ सकता है। धैर्य बेहद जरूरी है।
  • तार्किक क्षमता: जटिल प्रणालियों को छोटे-छोटे भागों में तोड़कर समझना और उनके तार्किक संबंधों को पकड़ना होगा।
  • विवरण पर ध्यान: वीएलएसआई डिजाइन में एक भी गलत कनेक्शन पूरी चिप को बेकार कर सकता है। बारीकियों पर ध्यान देना जरूरी है।

क्या अनुभव जरूरी है?

  • सामान्य उम्मीदवारों के लिए: अनुभव अनिवार्य नहीं है, लेकिन बेहद वांछनीय है। जिन उम्मीदवारों ने अपनी परास्नातक या स्नातक परियोजना में वीएलएसआई, एम्बेडेड सिस्टम या मशीन लर्निंग पर काम किया है, उन्हें स्पष्ट रूप से प्राथमिकता दी जाएगी।
  • प्रत्यक्ष एसआरएफ पद के लिए: एम.टेक. के बाद न्यूनतम दो वर्ष का प्रासंगिक अनुभव अनिवार्य है।

चयन प्रक्रिया क्या है? (टेस्ट कैसे और कहां होगा?)

यह एक बहु-चरणीय और कठोर प्रक्रिया है।
१. आवेदन: सबसे पहले दिए गए ईमेल पर आवेदन भेजना होगा।
२. शॉर्टलिस्टिंग (१८ फरवरी २०२६): प्राप्त आवेदनों में से, योग्यता और अनुभव के आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। केवल शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को ही अगले चरण के लिए ईमेल से सूचित किया जाएगा।
३. चयन परीक्षा (२ मार्च २०२६): शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा (Written Test) और व्यक्तिगत साक्षात्कार (Personal Interview) के लिए आईआईटी पटना, विद्युत अभियांत्रिकी विभाग में सुबह १० बजे उपस्थित होना होगा।

  • लिखित परीक्षा में क्या पूछा जाएगा? संभवतः यह परीक्षा आपके तकनीकी ज्ञान को परखने वाली होगी। इसमें डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, एनालॉग इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर आर्किटेक्चर, वीएलएसआई डिजाइन (डिजिटल/एनालॉग), एम्बेडेड सिस्टम, सिग्नल प्रोसेसिंग, कम्युनिकेशन सिस्टम और मशीन लर्निंग के बुनियादी सिद्धांतों से जुड़े प्रश्न हो सकते हैं।
  • साक्षात्कार (इंटरव्यू) में क्या पूछा जाएगा? यहां आपकी अवधारणात्मक समझ, समस्या सुलझाने की क्षमता, और आपने अपनी पिछली परियोजनाओं/शोध में क्या किया है, उसके बारे में गहराई से पूछताछ की जाएगी। आपसे परियोजना से संबंधित तकनीकी सवाल पूछे जा सकते हैं, जैसे “आप RISC-V प्रोसेसर में एक नया इंस्ट्रक्शन कैसे जोड़ेंगे?”, “LoRa तकनीक की चुनौतियां क्या हैं?”, “मशीन लर्निंग मॉडल को चिप पर कैसे लागू करेंगे?”

परीक्षा की तैयारी कैसे करें?

  • मूलभूत अवधारणाएं: मॉरिस मानो की ‘डिजिटल लॉजिक डिजाइन’, डेविड ए. पैटरसन की ‘कंप्यूटर आर्किटेक्चर’ (RISC-V पर फोकस), रजा की ‘वीएलएसआई’ जैसी किताबों से बुनियादी अवधारणाएं साफ करें।
  • एम्बेडेड सिस्टम: माइक्रोकंट्रोलर (जैसे ARM Cortex-M सीरीज) आर्किटेक्चर, इंटरफेसिंग (I2C, SPI, UART) की प्रैक्टिकल समझ।
  • मशीन लरनिंग: एमएल एल्गोरिदम (जैसे न्यूरल नेटवर्क) को हार्डवेयर पर लागू करने की बुनियादी समझ। TensorFlow Lite for Microcontrollers जैसी चीजों का ज्ञान फायदेमंद रहेगा।
  • ईडीए टूल्स: यदि आपने कभी Vivado, ModelSim, Cadence Virtuoso, या MATLAB का उपयोग किया है, तो उस अनुभव को ताजा कर लें। इंटरव्यू में इस बारे में पूछा जा सकता है।
  • पिछला काम: अपनी एम.टेक/बी.टेक परियोजना को बहुत गहराई से समझें। आपने क्या किया, क्यों किया, क्या चुनौतियां आईं, उन्हें कैसे हल किया – इन सबको शानदार ढंग से समझाने का अभ्यास करें।

आवेदन कैसे करें? (Apply कैसे होगा?)

यह पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया है। कोई आवेदन शुल्क (फीस) नहीं है।

१. विज्ञापन के साथ दिए गए आवेदन पत्र के प्रारूप (फॉर्मेट) को भरना है। यह फॉर्मेट पीडीएफ के तीसरे पेज पर है, जिसमें नाम, पता, शैक्षिक योग्यता, श्रेणी, जन्मतिथि, गेट स्कोर आदि की जानकारी भरनी है।
२. इस भरे हुए फॉर्म की स्कैन की हुई प्रति (Scan Copy), गेट स्कोर कार्ड और एक विस्तृत बायोडाटा (Resume) जिसमें परियोजना के क्षेत्र (VLSI, Embedded, ML) से जुड़ा आपका अनुभव स्पष्ट रूप से दर्शाया गया हो, तैयार करना है।
३. इन तीनों दस्तावेजों को ईमेल से kcr@iitp.ac.in पर भेजना है।
४. अंतिम तिथि: १७ फरवरी २०२६। इस तिथि तक ईमेल पहुंच जाना चाहिए।

क्या आवेदन शुल्क है?

नहीं, इस पद के लिए आवेदन करने हेतु कोई शुल्क नहीं है।

चयन के बाद क्या होगा?

यदि आपका चयन हो जाता है, तो आपको पीएच.डी. कार्यक्रम में प्रवेश का एक स्वर्णिम अवसर मिलेगा। विज्ञापन में स्पष्ट लिखा है कि चयनित उम्मीदवार को स्प्रिंग २०२६ सेमेस्टर में आईआईटी पटना के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग में पीएच.डी. में प्रवेश दिया जाएगा। यह इस पद का सबसे बड़ा आकर्षण है। लेकिन इसके लिए आपको संस्थान के पीएच.डी. प्रवेश नियमों का पालन करना होगा। यानी, यह नौकरी के साथ पीएच.डी. करने का एक शानदार मौका है।

यह नौकरी किसे करनी चाहिए?

यह पद मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो:

  • शोध और अकादमिक क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं: यदि आपका सपना प्रोफेसर बनना या किसी अनुसंधान प्रयोगशाला में काम करना है, तो आईआईटी से पीएच.डी. और इस तरह की अत्याधुनिक परियोजना पर काम करने का अनुभय सोने पर सुहागा होगा।
  • सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन उद्योग में जाना चाहते हैं: भारत सरकार का सेमीकंडक्टर मिशन (C2S Programme) इसी क्षेत्र को बढ़ावा दे रहा है। आरआईएससी-वी और वीएलएसआई डिजाइन का यह अनुभव आपको कंपनियों (जैसे Intel, AMD, Nvidia, Texas Instruments, और कई स्टार्टअप्स) में बेहद मूल्यवान बना देगा।
  • जिन्हें गहराई से पढ़ने और समझने में मजा आता है: अगर आप सतही ज्ञान से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि यह जानना चाहते हैं कि एक प्रोसेसर कैसे सोचता है, एक चिप कैसे बोलती है, तो यह आपके लिए स्वर्ग के समान है।

यह उन लोगों के लिए नहीं है जो केवल एक स्थिर नौकरी और ९-५ की दिनचर्या चाहते हैं। यहां मेहनत बहुत करनी होगी, रात-रात भर जागकर सिमुलेशन चलाने पड़ सकते हैं, शोध-पत्र (Research Papers) पढ़ने और लिखने होंगे। लेकिन इस मेहनत का प्रतिफल भी बहुत बड़ा है – एक डॉक्टरेट की डिग्री, एक बेहतरीन रिसर्च पोर्टफोलियो, और देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान में काम करने का गौरव।

क्या पहले भी ऐसी नौकरियां आई हैं?

आईआईटी और अन्य शीर्ष संस्थानों में MeitY, DST, DRDO, ISRO जैसी एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित इस तरह की शोध परियोजनाओं पर जेआरएफ/एसआरएफ के पद नियमित रूप से निकलते रहते हैं। यह एक सतत प्रक्रिया है। हालाँकि, यह विशेष परियोजना आरआईएससी-वी और मशीन लर्निंग के संयोजन के कारण काफी अद्वितीय और वर्तमान समय के लिहाज से अत्यधिक प्रासंगिक है।

(FAQs)

प्रश्नउत्तर
पद का नाम क्या है?जूनियर रिसर्च फेलो (JRF)
कितने पद हैं?०१ (एक)
कहां काम होगा?आईआईटी पटना, विद्युत अभियांत्रिकी विभाग
आखिरी तारीख क्या है?१७ फरवरी २०२६ (ईमेल द्वारा)
शॉर्टलिस्ट की सूचना कब?१८ फरवरी २०२६
इंटरव्यू कब है?२ मार्च २०२६ (आईआईटी पटना में प्रत्यक्ष उपस्थित होकर)
मुख्य योग्यता क्या है?एम.टेक/बी.टेक (इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक्स/कंप्यूटर साइंस) + गेट स्कोर
सैलरी कितनी है?₹३७,००० (जेआरएफ) और ₹४२,००० (एसआरएफ)
क्या पीएच.डी. का मौका है?हाँ, यह इस पद का मुख्य आकर्षण है। चयनित उम्मीदवार को स्प्रिंग २०२६ में पीएच.डी. में प्रवेश मिलेगा।
क्या इंटरव्यू के लिए यात्रा भत्ता मिलेगा?हाँ, शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को द्वितीय श्रेणी के ट्रेन किराए की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
क्या आवेदन शुल्क है?नहीं, कोई शुल्क नहीं है।

मेरी राय?
यदि आप इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर हार्डवेयर के गहरे समुद्र में गोता लगाने के लिए तैयार हैं, और आपके अंदर असीम धैर्य और जिज्ञासा है, तो इस अवसर को हाथ से जाने न दें। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि आपके भविष्य की नींव रखने वाला एक मंच है। यहां मिलने वाला अनुभव, मार्गदर्शन (डॉ. कैलाश चंद्र रे जैसे अन्वेषक के अधीन) और आईआईटी का टैग आपके करियर को वह ऊंचाई दे सकता है, जो शायद ही कोई अन्य प्रारंभिक नौकरी दे सके। बस, अपनी तैयारी पूरी मजबूती से करें, अपनी मूलभूत अवधारणाएं साफ रखें, और इस चुनौती को स्वीकार करें।

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